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#The_Bhar_Tribe _act

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 #TheKashmirFiles  vs  #The_Bhar_Tribe_act  अब बात करते है #The_Bhar_Tribe_act की कहानी पर ।। यह बात है 1860-1865 की जब अंग्रेजी हुकूमत ने अपने परचम पूरे भारतवर्ष पर लहरा दिया था और वहाँ की जमीन-जायदाद पर कब्जा जमा रहे थे । तब इनको कोई रोक रहा था तो केवल #भर_राजपूत(वर्तमान #राजभर_क्षत्रिय) इतना ही नही मित्रो इन अंग्रेजो का साथ कुछ जयचंदो ने दिया जो आज जमींदार बने बैठे है । लेकिन #भर_राजपूतो अपने मान-सम्मान व स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नही किया ।  ब्रिटिश हुकूमत ये जान चूकी थी कि इनको(भर_राजपूतो) को अपने बस में करना लोहे का चना चबाने के बराबर है तो  अंग्रेजी हुकूमत ने वर्ष 1871 में एक नया कानून बनाया  #क्रिमिनल_ट्राइब्स_एक्ट को लागू किया  इस कानून के दायरे में लगभग 500 जातियों व जनजातियो को लाया गया । ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बहुत सारी ऐसी लड़ाकू जातियाँ थीं जिन्हें #क्रिमिनल_ट्राइब्स यानी #आपराधिक_जाति_जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था उसमें #भर_राजपूतो का नाम सर्वोपरि था । वस्तुतः इस अधिनियम के ज़रिये ब्रिटिश पुलिस को इन #भर_राजपूतो को गिरफ्त...

#महाशिवरात्रि🔱 पर विशेष 🚩🚩

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 👉#महाशिवरात्रि🔱 पर विशेष लेख ✍✍✍ आज है महाशिवरात्रि,हजारो वर्ष पहले #राजभर_क्षत्रियो ने महादेव को प्रसन्न करने के लिये अपने कंधे पर शिवलिंग धारण करके माँ #भागीरथी के पावन जल से #रुद्राभिषेक किया था तत्पश्चात महादेव प्रसन्न होकर सभी #राजभर_क्षत्रियो को #भारशिव🔱 की उपाधि दी "सभी देशवाशियों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं👏👏👏नाग जाति भगवान शंकर जी की महान पूजक थी, हे! भारशिव नागवंशी आर्य पुत्रों अपनें आपको जानों और पहचानों आप कौंन हैं, आपके पूर्वज क्या थे आपकी वीरता और आपकी महानता को भगवान शिव जी के साथ-साथ सभी इतिहासकारों नें अपनी लेखनी से आपके स्वर्णिम इतिहास को स्वर्णिम अक्षरों में विश्व पटल पर रखा है, नमन् है उन इतिहासकारों को जिन्होनें आपकी वीरता और आपकी महानता का गुणगान और आपकी यश कीर्ति का द्वीप पूरी दुनियाँ में प्रज्वलित किए  हैं, भारभूतेष का अर्थ स्पष्ट करें तो भूत का अर्थ प्राणी अथवा जाति है, भारभूतेष का पूर्ण अर्थ भार जाति का ईश्वर शिव हैं, भारभूतेष शब्द भार जाति एवं शिव का घनिष्ठ सम्बंध दर्शाता है,"राजवंशानाम् भारशिवानाम्" माँ भगवती पार्...

#भर-राजपूत(राजभर_क्षत्रिय)राजा से हुए #रंक पर विशेष

 👉राजा से रंक कैसे हुए #राजभर_क्षत्रिय पर कुछ विशेष  [ठाकुर श्री #प्रवीण_सिंह एवं #मनोज_राय की कलम से ]÷  कुछ ज्ञानी महानुभाव अज्ञानता के कारण राजा की औलाद को अपमानित करने का घृणित कार्य करते हैं और सवाल उठाते हैं कि जब आपके पूर्वज राजा थें तब उनकी औलादें रंक कैसे हुई?? उन महानुभावों के सवालों का जवाब हैं कि राजा की औलाद रंक कैसे हुएँ?? 👉 आप और पूरे देशवासी अच्छी तरह जानते हैं कि SC, ST, OBC  स्वतंत्र भारत के बाद सरकार की पालिसी है, आजादी से पहले SC, ST, OBC नहीं था,, आजादी से पहले वर्ण व्यवस्था थी।वर्ण व्यवस्था में #चार_वर्ण ÷ #ब्राम्हण, #क्षत्रिय, #वैश्य, #शुद्र।। भारत को सोनें की चिड़ियाँ कहा जाता था । विदेशी लुटेरा यहाँ शुद्रों को लुटनें नहीं आते थें, विदेशी लुटेरा यहाँ के राजा महाराजाओं की अपार धन संम्पदा को लूटने आये थें।। जो लड़ा वो खत्म हो गया। विदेशी लुटेरा #मोहम्मद_गजनवी यहीं के चाटुकार चंद गद्दारों के सहयोग से भारत के #शोमनाथ_मन्दिर को 17 बार लूटा ।। #महाराजा_सुहेलदेव_राजभर जी के वंशज राजा से रंक कैसे हुए ?? 👉👉 राजा से रंक होने का कारण÷  10 जून 10...

Rajputana-The Complete Encyclipedia of Gotra #Bhardwaj(Nagvanshi_Rajput /Bhar_Rajput

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 Rajputana- The Complete Encyclipedia(Nagvanshi_Rajput/Bhar_Rajput Gotra #BHARDWAJ(भारद्वाज)       राजपूतों की वंशावली  “दस रवि से दस चन्द्र से बारह ऋषिज प्रमाण, चार हुतासन सों भये कुल छत्तिस वंश प्रमाण भौमवंश से धाकरे टांक #नाग🐍🐍 उनमान चौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण.” अर्थ:-दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय दस चन्द्र वंशीय,बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है,बाद में भौमवंश नागवंश क्षत्रियों को सामने करने के बाद जब चौहान वंश चौबीस अलग अलग वंशों में जाने लगा तब क्षत्रियों के बासठ अंशों का पमाण मिलता है। सूर्य वंश की दस शाखायें:- १. कछवाह २. राठौड ३. बडगूजर४. सिकरवार ५. सिसोदिया ६.गहलोत ७.गौर ८.गहलबार ९.रेकबार १०. नागवंशी(भारद्वाज) चन्द्र वंश की दस शाखायें:- १.जादौन २.भाटी ३.तोमर ४.चन्देल ५.छोंकर ६.होंड ७.पुण्डीर ८.कटैरिया ९.स्वांगवंश १०.वैस अग्निवंश की चार शाखायें:- १.चौहान २.सोलंकी ३.परिहार ४.पमार. ऋषिवंश की बारह शाखायें:- १.सेंगर २.दीक्षित ३.दायमा ४.गौतम ५.अनवार (राजा जनक के वंशज) ६.विसेन  ७.करछुल  ८.हय ९.अबकू तबकू ...